चना अगले दस दिनों तक धीमी चाल चलेगा। चने में गति इस बात पर निर्भर है कि आने वाले दिनों में बेसन की कैसी मांग निकलती है। मानसून के छाने के बाद देश भर में बेसन की मांग बढ़ती है और उस समय चने के दाम 50/100 रुपए क्विंटल बढ़ सकते हैं अन्यथा चना हाजिर में 2000/2300 रुपए क्विंटल के बीच घूमता रहेगा।
देश में इस वर्ष लगभग 52 लाख टन चना पैदा हुआ है जो सरकारी आंकड़े 59 लाख टन की तुलना में सात लाख टन कम है। हालांकि, आस्ट्रेलिया में चने की उपज और रकबे में बढ़ोतरी के समाचार आए हैं। आस्ट्रेलिया में इस साल चने का उत्पादन तीन लाख टन रहने का अनुमान जताया गया है। पिछले साल जबरदस्त सूखे के बावजूद आस्ट्रेलिया में 2.21 लाख टन चने की उपज हुई थी। चने की कीमतों पर पड़े दबाव के कई कारण हैं जिनमें इसका आयात करने और दूसरी दलहनों के निर्यात पर रोक मुख्य हैं। सरकार ने चने का आयात करने का जो फैसला किया है, उससे अब लगता है कि देश में चने की कमी दिखाई नहीं देगी। साथ ही अमरीकी डॉलर की तुलना में रुपए के मजबूत होने से आयात सस्ता बैठ रहा है।
देश की राजधानी दिल्ली में चने का स्टॉक साढ़े तीन से साढ़े चार लाख टन बताया जा रहा है। लेकिन दाल मिल वाले तभी चना खरीदते हैं जब उनके पास दाल की आपूर्ति का ऑर्डर आता है। दिल्ली में इन दिनों रोजाना 30/35 ट्रक चना आता है जबकि इसकी आवक इस समय 125/150 ट्रक होनी चाहिए। मध्य प्रदेश की मुख्य मंडी इंदौर में भी चने की आवक 10/15 ट्रक है, जबकि आम तौर पर इस समय यह आवक 50/75 ट्रक होती है। मध्य प्रदेश में इस साल कांटेवाला चने की उपज दो से तीन लाख टन घटने की रिपोर्ट है।
June 4, 2007
चना चलेगा धीमी चाल
Subscribe to:
Post Comments (Atom)



0 comments:
Post a Comment