May 6, 2007

भारतीय चीनी विदेशियों को खटकी

भारत में इस साल रिकॉर्ड चीनी उत्‍पादन होने की वजह से अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में इसकी भरमार देखी जा रही है। जिससे चीनी की कीमतों में गिरावट बरकरार रहने की आशंका है। भारत में इस सीजन में तकरीबन 250 लाख टन चीनी का‍ रिकॉर्ड उत्‍पादन होने जा रहा है, जो हमारी घरेलू मांग से कहीं ज्‍यादा है। सरकार का मानना है कि अगले सीजन में चीनी का उत्‍पादन 300 लाख टन के नजदीक रह सकता है। यदि ऐसा होता है तो चालू सीजन और अगले सीजन का चीनी कैरी फारवर्ड स्‍टॉक 180 लाख टन रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस स्‍टॉक का मतलब होगा हमारी सालाना मांग के बराबर स्‍टॉक और यही स्‍टॉक चीनी उद्योग के लिए अभी भी से चिंता का कारण बनता जा रहा है।

हमारे देश में चालू सीजन में रिकॉर्ड चीनी उत्‍पादन होना इस समय विदेशी बाजारों के विश्‍लेषकों और उद्योग के लिए मुसीबत बन गया है क्‍योंकि वे जानते है कि भारतीय चीनी, उनकी चीनी को अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में बिकने में रोडा बन सकती है। इस बात की पूरी आशंका है कि दूसरे देश अंतरराष्‍ट्रीय चीनी बाजार में भारत के दबदबे को कम करने के लिए अपने हाजिर बाजारों में चीनी की कीमतों को कम कर सकते हैं, जिससे वहां के लेवाल भारतीय चीनी को कम वरीयता दें। कमोडिटी विश्‍लेषक मानते हैं कि भारत में चीनी का रिकॉर्ड उत्‍पादन होने से ही लंदन व न्‍यूयार्क में चीनी वायदा में गिरावट आई है। अब आने वाले एक दो वर्षों में भारत से निर्यात के लिए चीनी भरपूर उपलब्‍ध होने से इसके दाम और नीचे आएंगे।

स्विट्जरलैंड स्थित जे किंग्‍समैन ब्रोकर सोसायटी के मुखिया किंग्‍समैन का कहना है कि अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में चीनी उद्योग को केवल भारत की वजह से इतने बुरे दिन देखने पड़ रहे हैं। जबकि ब्रिटेन की जार्निकाउ कंपनी के मुताबिक भारत में चीनी का उत्‍पादन इस सीजन में 249 लाख टन होने की संभावना है। यह कंपनी मानती है कि भारत में इस सीजन में कोई 15 लाख टन चीनी निर्यात हो सकती है। जबकि किंग्‍समैन मानते हैं कि ब्राजील और थाईलैंड के औसतन 150-200 लाख टन चीनी निर्यात के मुकाबले भारत का हिस्‍सा केवल 15 लाख टन है लेकिन अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में सीमित मांग की वजह से ब्राजील और थाईलैंड से चीनी का निर्यात कम रहने की संभावना है। वहीं भारत में चीनी पर निर्यात सब्सिडी मिलने से चीनी आयातक देश ब्राजील और थाईलैंड की तुलना में सस्‍ती भारतीय चीनी खरीद सकेंगे। ऐसे में बाजार में बने रहने और भारतीय चीनी के प्रभाव को कम करने के लिए इन दूसरे देशों को भी अपनी चीनी के दाम घटाने पर मजबूर होना पड़ेगा जिसका सीधा असर इसके दामों पर पड़ेगा।

पेरिस के कमोडिटी विश्‍लेषक जेएट भी विश्‍लेषकों से सहमति जताते हुए कहते हैं कि भारत में चीनी उत्‍पादन बढ़ने से अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में स्थिति बदतर हो रही है। वे कहते हैं कि पिछले साल भारत में मौसम खराब रहने से चीनी का उत्‍पादन प्रभावित हुआ था जिससे लंदन और न्‍यूयार्क में चीनी वायदा रिकॉर्ड स्‍तर पर चला गया था। लेकिन मौजूदा रुझान को देखते हुए यही लगता है कि अभी कीमतें और नीचे जा सकती हैं। अगले एक दो वर्षों तक भारत के बढ़ते चीनी उत्‍पादन का सामना अंतरराष्‍ट्रीय बाजार को करना पड़ेगा। आस्‍ट्रेलिया के कॉमनवैल्‍थ बैंक के भी विचार इससे कुछ अलग नहीं है। बैंक का कहना है कि अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में चीनी की बहुतायत होने से चीनी वायदा और गिरेगा।

चीनी का चालू सीजन खत्‍म होने में केवल पांच महीने बचे हैं लेकिन केंद्र सरकार चीनी निर्यात की मात्रा पर असमंजस की स्थिति में है। इस साल देश में 250 लाख टन चीनी का रिकॉर्ड उत्‍पादन होने की संभावना जताई जा रही है लेकिन अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में चीनी के दाम बुरी तरह गिरने से निर्यातक ज्‍यादा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने चीनी सीजन वर्ष 2006-07 के दौरान लगभग 15 लाख टन चीनी का निर्यात करने की बात कही है, हालांकि केंद्र सरकार ने निर्यात लक्ष्‍य तय नहीं किया है। यद्यपि खाद्य मंत्रालय और उद्योग का मानना है कि देश्‍ा से 25 लाख टन चीनी का निर्यात किया जा सकता है। जिसमें से 15 लाख टन चीनी खुले सामान्‍य लाइसेंस यानी ओजीएल के तहत और शेष दस लाख टन चीनी एडवांस लाइसेंसे के तहत निर्यात की जाएगी। नेशल फैडरेशन ऑफ को ऑपरेटिव शुगर फैक्‍टरीज के प्रबंध निदेशक विनय कुमार का कहना है कि चालू सीजन में रिकॉर्ड चीनी उत्‍पादन होने से देश से बीस लाख टन चीनी निर्यात हो सकती है। गौरतलब है कि देश से चीनी सीजन वर्ष 2005-06 में 12 लाख टन चीनी का निर्यात हुआ था। जबकि चीनी सीजन वर्ष 2003-04 में 15 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया था।

भारतीय चीनी विश्‍लेषकों का कहना है कि घटे अंतरराष्‍ट्रीय दाम और बंदरगाहों की कम क्षमता के कारण देश से चीनी सीजन वर्ष 2006-07 के दौरान मात्र आठ लाख टन चीनी निर्यात होने की उम्‍मीद है। चीनी लेवाल 300-305 डॉलर प्रति टन पर चीनी खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं जबकि बिकवाल चीनी के भाव 310-315 डॉलर प्रति टन बोल रहे हैं। चालू सीजन में चीनी का उत्‍पादन 250 लाख टन होने की संभावना है, जबकि मांग 190 लाख टन के आसपास है। लंदन में चीनी अक्‍टूबर वायदा इन दिनों 308 डॉलर प्रति टन के आसपास चल रहा है, जबकि मुंबई में चीनी 1285-1315 रुपए प्रति क्विंटल बोली जा रही है और इसमें फिलहाल तेजी के आसार नहीं है। भारतीय कमोडिटी एक्‍सचेंजों में भी चीनी वायदा लगातार घटता जा रहा है। भारत में चीनी का रिकॉर्ड उत्‍पादन भारतीय चीनी उद्योग के अलावा अंतरराष्‍ट्रीय खिलाडि़यों के लिए भी सरदर्द बन गया है। इस सरदर्द की वजह से जहां आने वाले दिनों में चीनी के दाम और गिरेंगे वहीं चीनी शेयरों में निवेश नुकसानदायी हो सकता है।

3 comments:

संजय बेंगाणी said...

सरहानीय प्रयास. आशा है इस चिट्ठे पर लगातार उपयोगी जानकारी देते रहेंगे.

Aflatoon said...

इस चिट्ठे का स्वागत है । मेरा निवेदन है कि प्रिंट में भी आप इन्हें देते रहे ।

परमजीत बाली said...

कमोडिटी मित्र ,बहुत अच्छी और सटीक जानकारी दी है। आशा है ऎसी जानकारियां आप के ब्लोग पर मिलती रहेगी। बधाई ।