January 3, 2009

आधुनिक धृतराष्ट्र हैं सत्‍यम के अध्‍यक्ष रामलिंगा राजू

भारत के इतिहास में एक बार पुन: महाभारत की कथा दोहराई जा रही है और इस बार बिसात बना है कॉर्पोरेट जगत। इस खेल में धृतराष्ट्र की भूमिका सत्यम के संस्थापक राजू ने निभाई है जिन्होंने अपने पुत्र मोह में अपनी कंपनी को ही दांव पर लगा दिया। द्रौपदी की भूमिका में सत्यम कंप्यूटर स्वयं शामिल है। स्वतंत्र निदेशक जिसमें विनोद धाम जैसे दिग्गज और आईबीएस के डीन राव जैसे प्रख्यात मैनेजमेंट गुरु शामिल थे, इनकी भूमिका द्रोणाचार्य और भीष्म जैसी रही जिन्होंने द्रौपदी का चीरहरण अपनी आंखों के आगे निर्लजता से होते देखा।

अफसोस की यह घटना कलियुग में हुई और सत्यम को बचाने के लिए कृष्ण जैसे दृष्टा कहीं मौजूद नहीं थे। मेटास समूह में दिखाई गई सत्यम कंप्यूटर के प्रमोटर्स की दिलचस्पी का घटनाक्रम केवल इस डील के खात्मे पर नहीं खत्म हुआ है इससे जुड़े हुए कई समानांतर कड़ियां हर दिन प्रकाश में आ रही हैं जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि किस प्रकार निवेशकों की गाढ़ी कमाई का फैसला एक झटके में संस्थागत निवेशक और प्रमोटर्स कर देते हैं। इसकी सबसे ताजा कड़ी मीडिया से छनकर आने वाली ऐसी खबर है जो किसी भी शेयरधारक के लिए झटके से कम नहीं है।
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